शांति और सौहार्द का प्रतीक है होली का पर्व:डॉo प्रेम पाल शास्त्री
हापुड़,सीमन (ehapurnews.com):शांति और सौहार्द का प्रतीक है होली का पर्व,ये विचार आर्य समाज हापुड़ में हुए चतुर्वेद शतक यज्ञ में डॉo प्रेमपाल शास्त्री यज्ञ के ब्रह्मा ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यह यज्ञ नवसंवत्सर के समान ॠतुसंधि के अवसर पर नवसस्येष्टि के नाम से जाना जाता है नवीन अन्न को ग्रहण करने से पूर्व प्रत्येक ग्रहस्थ नवीन अन्न की हवि यज्ञ में प्रदान करता है तथा परस्पर वितरण करके ही अन्न ग्रहण करता है। यज्ञ की संस्कृति हमें त्याग की शिक्षा देती है।

आर्य समाज के धर्माचार्य आचार्य धर्मेंद्र शास्त्री ने बताया कि पुराने समय में केशु के पुष्प पानी में भिगोकर रखते थे जिससे जल केसरिया हो जाता था इस जल को एक दूसरे पर डालने से चर्म रोग नष्ट होते थे सर्वहित की भावना विद्यमान रहती थी परंतु आज का मानव केमिकल और दूसरे रंग डालकर एक दूसरे का अहित कर रहा है जो की सर्वथा त्याज्य है आर्य समाज के मंत्री संदीप आर्य ने बताया कि प्राचीन काल में सामूहिक यज्ञ होते थे सभी के सहयोग से विशाल यज्ञों का आयोजन होता था जैसे आजकल हम बुरकले आदि होली में देखते हैं यह यज्ञों का विकृत रूप है जिसमें सुधार की महती आवश्यकता है आर्य समाज इसी पर बल देता है मंत्री जी ने सभी का आभार व्यक्त किया कार्यक्रम में प्रधान पवन आर्य ,आनंद प्रकाश आर्य, नरेंद्र आर्य, सुरेंद्र कबाड़ी, मोहित सिंघल , सुरेश सिंघल, अमित शर्मा एवं यजमान वरुण आर्य, अनुपम आर्य , मदन लाल जी , माया आर्या ,आकाश आर्य , कुश अग्रवाल , प्रदीप आर्य ,वेद पाठी मोहित शास्त्री, विनय आर्य , जितेंद्र शास्त्री आदि आर्य समाज के पदाधिकारी , सदस्य एवं नगरवासियों ने भाग लिया ।
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