हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : हापुड़ के धन कुबेरों ने अब कालेधन को सफेद करने का एक नया तरीका खोज निकाला है और धनकुबेर कालेधन का निवेश प्रोपर्टी में कर रहे है। प्रोपर्टी के बढ़ते हुए दामों के कारण आम लोगों का हापुड़ की रेलवे रोड पर प्रोपर्टी खरीदना अब महंगा हो गया है। रेलवे रोड के मुख्य मार्ग पर बिक्री के लिए बाजार में आई दुकानें की कीमत चार लाख रुपए प्रति गज के हिसाब से लगाई जा रही है। जबकि की दुकानों का किराया भी 50 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए प्रति माह तक हो गया है।
हापुड़ का रेलवे रोड नगर का माल रोड कहां जाता है जिस पर 24 घंटे चहल-पहल रहती है। बड़े-बड़े शोरुम, फुड प्लाजा सैंटर, होटल व रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर, चिकित्सकों को क्लीनिक, ज्वैलर्स, बड़े सैलून, बड़े ब्यूटी पार्लर आदि रेलवे रोड पर है और दिन पर दिन रोजगार भी बढ़ रहा है। प्रोपर्टी में निवेश करने वाले धनकुबेरों का आकर्षण रेलवे रोड पर बढ़ा है। जिस कारण मुख्य मार्ग पर प्रोपर्टी के दाम 4 लाख रुपए प्रति गज मांगे जा रहे है। हापुड़ के रेलवे रोड पर करीब 125-125 गज में करीब एक दर्जन ऐसे व्यवसायिक प्रतिष्ठान है जिनके सौदे बिक्री हेतु खुले बाजार में है। प्रोपर्टी के दलाल ऊंचे रेट में लोगों को फसाने में जुटे है और उन्हें भविष्य में प्रोपर्टी के रेट बढ़ने पर फायदे गिना रहे है। रेलवे रोड से जुड़े शिवपुरी, रेवती कुंज, पटेलनगर, रामगंज, राधापुरी, तारामिल कालोनी तथा फ्री गंज रोड पर बसी कालोनियों में प्रोपर्टी के दाम आसमान छू रहे है। सड़क किनारे की प्रोपर्टियां इन मौहल्लों में एक से डेढ़ लाख रुपए प्रति गज तथा अंदरुनी भाग में 40 हजार रुपए से 50 गज के दाम बताए जा रहे है। हापुड़ के बैनामा दफ्तर में भी रिकार्ड बैनामे हुए है। जिस कारण प्रदेश सरकार को राजस्व तो मिला है, परंतु जितना मिलना चाहिए था उसके मुकाबले प्राप्त राजस्व ऊंट के मुंह में जीरा है। यानी कि बाजार भाव से कम कीमत पर सर्कल रेट पर बैनामे होने के कारण सरकार को राजस्व की हानि उठानी पड़ी है और कालेधन के कुबेरों के हौसले बढ़े है। यदि सरकार रेलवे रोड पर और उससे जुड़ी कालोनियों में कोरोना काल से लेकर हुए बैनामों की जांच कराएं तो अरबों रुपए का राजस्व सरकार को मिलेगा।
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