
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष न्यायाधीश गिरोहबंद अधिनियम ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में पुलिस द्वारा गैंग चार्ट में गलत तथ्य प्रस्तुत करने पर डीएम, एसपी और हापुड़ कोतवाली प्रभार निरीक्षक को तलब किया है। 5 फरवरी को तीनों की व्यक्तिगत पेशी के आदेश दिए हैं। सभी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष न्यायाधीश गिरोहबंद अधिनियम वीरेश चंद्र द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार एक मुकदमे में अभियुक्त रजनी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में नियमित जमानत के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियुक्त के अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि गैंग चार्ट में उसके विरुद्ध दो मुकदमे दर्शाए गए हैं जबकि इन दोनों मामलों में ना तो आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुए हैं और ना ही न्यायालय ने संज्ञान लिया है। अभियुक्त पहले से ही थाने से जमानत पर है।
न्यायालय द्वारा अभिलेखों के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि गैंग चार्ट को 9 दिसंबर 2025 को डीएम और एसपी ने अनुमोदित किया था जबकि उसमें यह दर्शाया गया कि दोनों मामलों में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुके हैं। न्यायालय के रिकॉर्ड में प्रमाणित प्रतिलिपियों से स्पष्ट हुआ कि यह तथ्य असत्य है। इस मामले में 30 जनवरी 2026 को ही हापुड़ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया गया और डीएम और एसपी से जिला शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से जवाब मांगा था। सोमवार की सुनवाई में कोई भी स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं हुआ। इसके बाद न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ता के स्थगन प्रार्थना पत्र को ₹50,000 हर्जाने पर स्वीकार करते हुए थाना प्रभारी के वेतन से कटकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया। सात फरवरी को डीएम, एसपी और हापुड़ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।























