
वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण का समापन समारोह
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत संचालित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई 24 दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण का समापन समारोह उच्च प्राथमिक विधालय मुरादपुर, सैना, कुराना, दरियापुर व रझेड़ा ब्लॉक सिंभावली जनपद हापुड़ में बहुत जोश और उत्साह के साथ किया गया। समस्त छात्राओं को प्रधानाध्यापक उमेश त्यागी, ममता सिरोही, महताब आलम, डॉ अरुण कुमार, जिला व्यायाम शिक्षक व प्रशिक्षिक मनप्रीत खैरा के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित करके कार्यक्रम समाप्त किया गया। प्रशिक्षण में व्यायाम / योगा आत्मरक्षा, आत्मरक्षा की विधियाँ, हेल्पलाइन लाइन नंबर, आत्मरक्षा किट, लैंगिक सशक्तिकरण संबंधित गतिविधियाँ व अन्य विषय के बारे में बताया गया। खंड शिक्षा अधिकारी सिंभावली योगेश गुप्ता ने बताया की शासन ने बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सशक्तिकरण और स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति का पांचवां चरण चल रहा है। इसके तहत उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बालिकाओं को रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम जुलाई से शुरू होकर छः माह तक यानि जनवरी 2025 तक चलेगा। इस कार्यक्रम के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। जनपद में 210 विद्यालयों में 16 व्यायाम शिक्षक, शारीरिक शिक्षा अनुदेशक बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देंगे। शासन ने बालिकाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से शारीरिक व मानसिक रूप से आत्म निर्भर बनाने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। ताकि बालिकाएं किसी भी विषम परिस्थतियों में बिना विचलित हुए उसका सामना कर सके। अटैक इज द बेस्ट फोर्म ऑफ सेल्फ डिफेंस के मूल मंत्र को ध्यान में रखते हुए आत्म रक्षा प्रशिक्षण की कार्य योजना तैयार की गई है। इसके लिए वे उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों का चयन किय गया है, जिनमें बालिकाओं की संख्या ज्यादा है। जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट 495 विद्यालय संचालित है। इनमें 210 विद्यालयों का चयन रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया है। शासन ने प्रत्येक विद्यालय में बालिकाओं को 24 दिन का प्रशिक्षण दिया जाना है। बेसिक शिक्षा बालिका की जिला समन्वयक पूजा सैनी ने बताया कि जुलाई से छः माह तक बालिकाओं को रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिए जा रहा है। व्यायाम शिक्षकों व अनुदेशकों को विद्यालय आवंटन कर खंड शिक्षा अधिकारियों को कार्यक्रम संचालित कराने के निर्देश दिए गए हैं। व्यायाम व अनुदेशक को मिलेंगे तीन हजार रुपये रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए शासन ने बजट जारी किया है। इसके लिए प्रत्येक अनुदेशक को तीन हजार रुपये दिए जांएगे। शासन की तरफ से प्रशिक्षण के लिए चयनित विद्यालयों के खाते में धनराशि भेजी जाएगी। 24 दिन का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद व्यायाम शिक्षकों व अनुदेशकों को यह धनराशि दी जाएगी। इसके अलावा एक हजार रुपये की धनराशि विद्यालय स्तर पर कार्यक्रम का बैनर बनाने, बालिकाओं को प्रमाण पत्र देने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को सम्मानित करने पर खर्च की जाएगी। ज़िला व्यायाम शिक्षक व आत्मरक्षा प्रशिक्षक मनप्रीत खैरा ने बताया की रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मार्शल आर्ट तकनीकों और आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम बनती हैं। इस योजना में जूडो, कराटे, ताइक्वांडो जैसी कलाओं का प्रशिक्षण शामिल है और इसका उद्देश्य उन्हें कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में यह अभियान चलाया जा रहा है, जहाँ प्रशिक्षण के लिए आवश्यक किट और धनराशि भी स्कूलों को भेजी गई है। खैरा ने कहा कि वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बन सकें। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए तैयार करना है। शासन की ओर से बेटियों को यह प्रशिक्षण आत्म सुरक्षा के दृष्टि से दिलाया जा रहा है, ताकि बेटियां सशक्त बन सकें। इस प्रशिक्षण से बालिकाओं के भीतर आत्म बल का विकास होगा। प्रशिक्षण में मार्शल आर्ट प्रशिक्षु बेटियों को जूडो कराटे ताइक्वांडो में पारंगत किया गया, ताकि विपरीत परिस्थितियों में आने पर वह स्वयं मुकाबला कर सकें। बालिकाओं को जरूरी हेल्पलाइन नंबर भी नोट कराए गए। विद्यालय की साहसी बेटियां आत्मरक्षा के गुर सीखकर सशक्त और निर्भीक बन रही हैं बेटियां। बेटियों को तितली नहीं, मधुमक्खी बनाइए, जिनके पास पंख भी हों और डंक भी। शहद जैसी मिठास से भरपूर, किन्तु जरूरत पड़ने पर मुंह सुजा देने की क्षमता रखने वाली बेटियां न केवल खुद की बल्कि समाज की भी रक्षा करने में सक्षम हैं। खेलकूद के विषय के बारे में भी बालिकाओं को जागरूकत किया कि जीवन में धैर्य और अनुशासन से ही व्यक्ति सफल हो पाता है और खेलों में भी धैर्य और अनुशासन ही जीत की पूंजी है। एक अच्छा खिलाड़ी खेल में आई हुई कठिनाईयों से उभरकर जीत का वरण करता है और ऐसे ही जीवन में खेलों जैसी जीवटता रखने वाला व्यक्ति कभी हारता नहीं। खेल के अभ्यास से मनुष्य का चारित्रिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक उमेश त्यागी, ममता सिरोही, महताब आलम, डॉ अरुण कुमार, शिक्षक मो० असद, दिव्या सेन, अर्चना, लक्ष्मी, मो० फ़िरोज़, अरविंद कुमार, अरविंद, नीतू तोमर, शिक्षामित्र सीमा, नरेंद्र कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।
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