
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): 7 सितंबर से शुरु हुए पितरों को प्रसन्न करने हेतू महालय पक्ष में श्राद्ध पूर्ण विधि विधान से किया जा रहा है सभी अपने पूर्वजों के मृत्यु तिथि पर श्राद्ध, तर्पण, दान श्रद्धापूर्वक कर रहे है इसी क्रम में आज 11 सितंबर वृहस्पतिवार को चतुर्थी एवं पंचमी का श्राद्ध किया जाएगा साथ ही भरणी महाश्राद्ध भी होगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के० सी० पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि श्राद्ध हमेशा क़ुतुप (मध्यान्ह) या अपरान्ह काल में करना ही सही होता है चतुर्थी तिथि 10 सितम्बर को दोपहर बाद 3.38 से प्रारम्भ होकर 11 सितंबर को दोपहर 12.45 बजे तक है तथा पंचमी तिथि 11 सितम्बर को दोपहर 12.45 से प्रारम्भ होकर 12 सितंबर को सुबह 9.58 तक ही है जबकि भरणी नक्षत्र 11 सितंबर को अपरान्ह 1.58 से 12 सितंबर को सुबह 11.58 तक है भरणी नक्षत्र का श्राद्ध अपरान्ह में ही विशेष फलदायक होता है 11 सितम्बर को चतुर्थी तिथि मध्यान्ह तथा पंचमी तिथि और भरणी नक्षत्र अपरान्ह में प्राप्त है जो श्राद्ध के लिए अत्यंत शुभदायक है पंडित के० सी० पाण्डेय ने भरणी श्राद्ध के महत्व को बताते हुए मत्स्यपुराण के श्लोक का उदाहरण दिया “भरणी पितृपक्षे तु महती परिकीर्तिता । अस्यां श्राद्धं कृतं येन स गयाश्राद्धकृद्भवेत्।। अर्थात् भरणी में श्राद्ध अतिप्रशस्त (उत्तम) है। पितृपक्ष में और भरणी नक्षत्र में श्राद्ध (इदं पिण्डरहितं कार्यम्) श्रेष्ठ कहा गया है। भरणी में किया गया श्राद्ध गयातीर्थ में किये हुए श्राद्ध के बराबर होता है। 11 सितंबर को दोपहर 1.58 तक सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा श्राद्ध में 3 पीढ़ी पिता पक्ष (पिता, पितामह, प्रपितामह ) तथा 3 पीढ़ी माता पक्ष ( माता, पितामही, प्रपिता मही) का श्राद्ध, तर्पण किया जाता है।
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