
वैदिक यज्ञ एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से गूंजा आर्य समाज मंदिर
हापुड़,सीमन (ehapurnews.com):आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में बुधवार को ऋषि बोधोत्सव के अंतर्गत प्रातःकालीन सत्र वैदिक यज्ञ के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। यज्ञ ब्रह्मा धर्माचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक अग्निहोत्र कराया गया। यज्ञमान के रूप में श्रीमती सहित चमन सिंह शिशोदिया, श्रीमती सहित सुनील शर्मा तथा श्रीमती सहित विवेक गर्ग उपस्थित रहे।
यज्ञोपरांत शामली से पधारे यंत्रवादक सुभाष आर्य ने भजन “भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है, एक घर में अंधेरा है, एक घर में दिवाली है” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इसके पश्चात हिसार (हरियाणा) से आईं सुमधुर भजनोपदेशिका बहन कल्याणी आर्या ने “ईश्वर को भज प्राणी, जो चाहे निज कल्याण” सहित अनेक प्रेरणादायी भजनों की प्रस्तुति दी। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि संसार को प्रायः दुःखों का सागर कहा जाता है, किन्तु महर्षि दयानंद ने बताया कि संसार में सुख अधिक है, दुःख कम; मनुष्य स्वयं दुःख को बड़ा करके देखता है और अपने जीवन के असंख्य सुखों को भूल जाता है। उनके भजन “जिंदगी में सुख के दुःख के साये भी होंगे” तथा “भलाई करोगे भलाई मिलेगी” ने कर्म और सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश दिया।
इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय प्रखर वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य सुख में आसक्त रहता है, दुःख में नहीं। मृत्यु को बड़ा दुःख माना जाता है, परंतु शरीर प्रतिक्षण परिवर्तनशील है और प्रत्येक क्षण पुराना होकर नष्ट हो रहा है। उन्होंने आत्मचिंतन का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य के लिए यह जानना आवश्यक है कि ‘मैं कौन हूँ’ और ‘यह शरीर क्या है’। प्रश्न करने की प्रवृत्ति ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है। उन्होंने जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अवस्था का उल्लेख करते हुए आत्मज्ञान हेतु मुमुक्षुत्व की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, चिंतन और वैदिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। ऋषि बोधोत्सव के अंतर्गत यह आयोजन 15 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन दो सत्रों—प्रातः 7:00 से 10:00 बजे तथा सायं 4:00 से 6:30 बजे—तक आयोजित किया जाएगा।
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