हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हिंदी प्रोत्साहन समिति हापुड़ के तत्वावधान में एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात गजलकार,गीतकार प्रेम निर्मल रहे। अध्यक्षता डा. अनिल बाजपेई ने की तथा मंच संचालन गरिमा आर्य ने किया।
इस अवसर पर
प्रख्यात गजलकार प्रेम निर्मल ने पढ़ा,” उठो देश की नारियो, लो दुर्गा का रुप!तुम्हें बचाने अब यहां,संत न कोई भूप”!! डा.पुष्पा गर्ग ने पढ़ा”नारी तेरे रूप अनेक,काम है तेरे जग में नेक ।सृष्टि की तुम सुन्दर रचना,हम वंदन करते माथा टेक।।”
डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा,”बेटी बनकर जो सदा,दें बाबुल को प्यार,!कैसे कुछ मां कोख में,बेटी देती मार”!! अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार
डा. अनिल बाजपेई ने पढ़ा ,”नारी पन्ना है कभी,काली का अवतार,
कई रूप रखती वही,सृष्टि का आधार!!
संचालन करते हुए गरिमा आर्य ने पढ़ा,नारी को अधिकार नहीं था, वो बस थी मानो जागीर,
दे दुहाई परंपरा की, थोप रखी थीं भारी- भारी जंजीर।
तड़प उठी फिर नारी जाति हो उठी बड़ी अधीर,
तोड़े सारे बंधन ओछे, काटी मन की पीर। डा मीनू शर्मा ने पढ़ा,”नारी तो विश्वास है
उम्मीदों की आस है,
गौरव और अभिमान है, नारी
प्रकृति की पहचान है, नारी
इस को शत-शत प्रणाम है,
इससे ही घर की शान है,” डा मीनू वर्मा ने पढ़ा,” सृष्टि का संबल है नारी,
प्रेम का आधार है नारी,
वक्त पड़े तो ,
लक्ष्मी, दुर्गा, पन्ना है नारी। डा. मनजीत सिंह अवतार ने पढ़ा,
“नारी अनुपम है, अनमोल है, महान है,
नारी समस्त जग में अमिट पहचान है,,
नारी तू शक्ति का अहसास है,
अनेको होने पर भी खास है। मुक्ता शर्मा ने पढ़ा, “हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही परम्परावादी जंजीरों से
बांधे है दुनिया के लोगों ने पैर मेरे
फिर भी उस जंजीरों को तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ”।
मकान व दुकान किराए पर देने, खरीदने या बेचने के लिए संपर्क करें. Call 9540030099





























