हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): जनपद हापुड़ के देहात क्षेत्र के गांव ततारपुर से निकल रही काली नदी गंगा की सहायक नदियों में से एक है लेकिन काली नदी का गंदा पानी गंगा को दूषित कर रहा है। अब शहर के नालों का गंदा पानी काली नदी के जरिए गंगा नदी में नहीं गिरेगा। इसके लिए जल निगम के अधिकारियों ने कमर कस ली है। नमामि गंगे योजना के तहत ततारपुर के पास 1500 वर्ग मीटर भूमि पर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। जल निगम के अधिशासी अभियंता बिना रावत ने बताया कि विभाग के उच्च अधिकारियों ने टेंडर जारी किया है लगभग 17 करोड़ रुपए की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण सहित अन्य कार्य किए जाएंगे। शहर के नालों के पानी का ट्रीटमेंट कर उसे खेती के उपयोग के लिए भी बनाया जाएगा।
जल निगम द्वारा इस प्लांट का निर्माण कराया जाएगा जहां तीन चरणों में पानी का ट्रीटमेंट होगा। ट्रीटमेंट के लिए पंपिंग स्टेशन भी बनाया जाएगा। टेंडर लेने वाली कंपनी को 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव का कार्य खुद ही करना होगा। इस प्लांट की प्रतिदिन छह मिलियन लीटर की क्षमता होगी।
बताते चलें कि ततारपुर में स्थित लगभग 115 औद्योगिक इकाइयों का केमिकल युक्त पानी तथा 40 से अधिक मोहल्लों का गंदा पानी काली नदी में गिरता है जो कि हापुड़ से होते हुए बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज और कन्नौज में पहुंचकर काली नदी में मिलती है। इसी के साथ ग्रामीण क्षेत्र की नालियों का पानी भी काली नदी में ही गिरता है। नमामि गंगे योजना के तहत अब ततारपुर के पास गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए प्लांट बनाया जाएगा।
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