हापुड, सीमन (ehapurnews.com): एस0एस0वी0 कॉलिज, हापुड के अंग्रेजी विभाग में सोमवार को आर0के0 नारायण के उपन्यासों में मिथको का पुनर्भाषण विषय पर कु0 रेनू द्वारा शोध प्रबन्ध प्रस्तुत किया गया एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें प्रो0 श्रवण कुमार शर्मा, गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे।
प्रो0 शर्मा ने कहा कि मिथक किसी भी संस्कृति के अभिन्न अंग होते है। वह उस देश के धर्म, रीतिरिवाज एवं परम्पराओं को परिभाषित करते हैं। किसी भी उपन्यास का मुख्य संदेश देने के लिये मिथक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं एवं युवा पीढी का मार्गनिर्देशन भी करते है। यही कारण है कि मिथकों का महत्व सार्वभौमिक है। शोध निर्देशक डॉ0 आर0के0 शर्मा ने कहा कि जब हम विष्णु के मोहिनी रूप की बात करते हैं या भस्मासुर की बात करते है तो संदेश स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति अपने बुरे कर्मो की सजा स्वयं ही पाता है। उपन्यास को संक्षिप्त रूप में कहने का माध्यम मिथक है। डॉ0 रानी तिवारी ने कहा कि प्राचीन पुराकथाओं का तत्व जो नवीन स्थितियों में नये अर्थ का वहन करें, मिथक कहलाता है। यह माना जाता है कि मिथक मूल्यपरक परिकल्पना पर आधारित होते हैं जिनका उददेश्य सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करना होता है।
शोधार्थी कु0 रेनू ने बताया कि आर0के0 नारायण के उपन्यासों में मिथक का महत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जैसे कि उनका प्रसिद्ध उपन्यास ‘‘गाईड’’ दर्शाता है कि यदि व्यक्ति चाहे तो वह शैतान से संत के पथ की तरफ अग्रसर हो सकता है। इनके उपन्यास मिथकों के प्रयोग के साथ में हमारे मनोविज्ञान को सहज रूप से दिखाते हैं।
इस अवसर पर डॉ0 रूचि अग्रवाल, श्रीमती रजनी अग्रवाल, देवेन्द्री गौड एवं परास्नातक के विधार्थी उपस्थित रहें। प्राचार्या डॉ0 रेनू बाला ने पूरे विभाग का उत्साहवर्धन किया।
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