हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : राजस्थान के कथा व्यास श्री गोपाल मोहन भारद्वाज जी महाराज ने सोमवार को हापुड़ में श्रीमद् भागवत कथा का श्रद्धालुओं को अमृत पान कराते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाएं व संत तो चौकीदार के समान है, जो लोगों को भारतीय व सनातन संस्कृति तथा हिंदू धर्म के प्रति जागरूक करने में जुटी है। प्रभु स्मरण और दीन दुखियों की सेवा ही आनंद है और आनंद ही परमात्मा है।
श्री राधा कृष्ण संकीर्तन मंडल हापुड़ की अगुवाई में 16 सितंबर तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में संत प्रवर ने कपिल गीता, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, प्रह्लाद चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि मां बाप की सेवा सच्ची ईश्वरीय पूजा है और जिंदगी भर भौतिक संसाधन जुटाने में लगे रहे, परंतु सुख व आनंद नहीं मिलेगा। प्रभु स्मरण, हरि संकीर्तन से जो आनंद की अनुभूति होती है वह भौतिक संसाधनों से लैस महलों में नहीं मिलती। भक्ति का अर्थ है, जिसको तुम प्रेम करते हो उसके इच्छा अनुसार रहो, यही भक्ति है।
श्रीमद् भागवत कथा से पहले आचार्य सचिन शर्मा ने मुख्य यजमान शांति स्वरूप गोयल, देवेंद्र सक्सेना एडवोकेट, प्रदीप सिंघल, राकेश कुमार शर्मा, शिवकांत गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, शरद अग्रवाल, बिजेंद्र भाटी दंपतियों को पूजा अर्चना संपन्न कराई।
संत प्रवर श्री गोपाल मोहन भारद्वाज ने कहा कि जिस स्थान पर कथा व हरी नाम संकीर्तन होता है वहां देवता भी धरा पर आ जाते हैं। हरिनाम संकीर्तन में रम जाने, कथा का अमृत पान करने और संत दर्शन करने से मानव को पापों से मुक्ति मिल जाती है। सत्य भगवान का स्वरूप है जिसे कलयुग भी नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
आचार्य मनु गोपाल भारद्वाज ने ईश्वर भक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए। कथा के मुख्य अतिथि अनिल कुमार गोयल, विशिष्ट सहयोगी ओम प्रकाश गर्ग, जगमोहन गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार सत्यप्रकाश सीमन आदि ने संत प्रवर का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
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