हापुड, सीमन (ehapurnews.com): स्वाधीनता संग्राम शहीद स्मारक समिति (पंजी.) हापुड़ एवं रामलीला समिति (रजि.) हापुड़ के संयुक्त तत्वावधान में अमर शहीदों के नाम एक कवि सम्मेलन का आयोजन रामलीला मैदान में किया गया।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता ललित कुमार छावनी वाले एवं रविंद्र गुप्ता ने की।कवि सम्मेलन का संचालन डा अनिल बाजपेई ने किया।
ललित कुमार छावनी वाले एवं रविंद्र गुप्ता ने कहा कि कवि साहित्यकार समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। सामाजिक विसंगतियों एवं विद्रूपताओं पर प्रहार करके समाज का मार्ग दर्शन करते हैं।वरिष्ठ उप प्रधान
अनिल आजाद एवं मंत्री विनोद वर्मा ने कहा हमारे समाज में कवि साहित्यकारों का आदिकाल से ही एक विशिष्ट स्थान रहा है।
कोषाध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने कहा कि सामाजिक संस्कृति के हो रहे अवमूल्यन को देखते हुए संस्कृति को बचाने के लिए कवियों का दायित्व और ज्यादा बढ़ जाता है।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ मेरठ की कवियित्री डा.शुभम त्यागी ने मां शारदे की वंदना से किया नोएडा से पधारे सुप्रसिद्ध कवि अमित शर्मा ने पढ़ा,बारूद भरा तुमने घाटी में उसको तो फटना ही था,कलंक बनी थी ३७० उसको तो हटना ही था।
मंच का संचालन करते हुए डा. अनिल बाजपेई ने पढ़ा,जो ना दे खुशबू औरों को वो चंदन तो नहीं होता, तपे बिन आग में सोना कभी कुंदन नही होता, नहीं है जिनकी आंख में वतन के दर्द का पानी ,जमाने में कहीं उसका कभी वंदन नही होता। एटा से पधारी प्रख्यात कवयित्री समीक्षा जादौन ने पढ़ा, सुनाई हैं जो अब तक सभी कहानी झूटी हैं
सबके नीचे मंदिर निकला जितनी मस्जिद टूटी हैं
तुम कहते हो उसे मकबरा हम कहते शिव मंदिर है
कतुब, ताज, मथुरा ,काशी सब तुमने हमसे लूटी हैं।
रुड़की से पधारे कवि विनय प्रताप सिंह ने पढ़ा,आओ उन्हें याद करें खाएं ये कसम
देश के शहीदों को भुलाएंगे न हम।
फरीदाबाद से पधारे कवि धर्मवीर शर्मा ने पढ़ा,रुक्मिणी बन के आओगी जब सामने
फिर समर्पण की थाली सजाऊंगा मैं
पल दो पल सोंप देना मुझे तुम चरण
बैठकर फिर महावर लगाऊंगा मैं।
बिजनौर से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि हुक्का बिजनोरी ने पढ़ा,रात के अंधेरे में ,अधिकारी,इंजीनियार एवं ठेकेदार में पता नही क्या करार हो गया,सुबह होते ही पुल नदी को लेके फरार हो गया।
विकास विजय त्यागी ने पढ़ा,वो वही मिट जाएगा ये वो सैनिक जानता है
लेकिन फिर भी वो सरहद को भगवान मानता है ।
डा शुभम त्यागी ने पढ़ा,हूँ महकते गुलाबों की बगिया सी मैं।
सूत्र मङ्गल से तुम और बिंदिया सी मैं।
तोड़कर सारे बन्धन चली आई हूँ,
एक समंदर से तुम और नदिया सी मै।प्रधान
रविंद्र गुप्ता,अनिल आजाद,विनोद वर्मा,उमेश अग्रवाल, प्रधान ललित कुमार छावनी वाले,विनोद गुप्ता,सुधीर अग्रवाल चोटी,चेतन उस्ताद,देवेंद्र अग्रवाल,राम कुमार गर्ग,नवीन वर्मा,शुभम गोयल ने सभी कवियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर समानित किया।
मुकुल त्यागी,राकेश वर्मा,मनीष मित्तल,कपिल अग्रवाल,अतुल सोनी,तरुण गुप्ता,उमेश अग्रवाल,सुयश वशिष्ठ,हरिप्रकाध जिंदल,महेश कंसल का सहयोग सराहनीय रहा।






























