हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): एस0एस0वी0 कॉलिज, हापुड के अंग्रेजी विभाग में ‘‘अंग्रेजी स्वरविज्ञान एवं भाषा विज्ञान’’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन मंगलवार को किया गया जिसमें एम0ए0 अंग्रेजी तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने भाषा विज्ञान, व्याकरण एवं भारत में अंग्रेजी भाषा के विकास उपविषयों पर अपने पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के आरंभ में अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 आर0के0 शर्मा ने कहा कि लार्ड मैकाले द्वारा बनाई गई शिक्षा पद्धति को सिर्फ इसलिये नहीं भुलाया जा सकता क्योंकि उन्होने कहा था कि भारत में अंग्रेजी भाषा पढने और पढाने का मुख्य उददेश्य अंग्रेजी साम्राज्य के लिए अच्छे कर्मचारियों का एक वर्ग तैयार करना है। निःसंदेह मैकाले के कारण ही आज हम इस स्तर तक पहुंचे है कि विज्ञान के भी उन्नत विषय अंग्रेजी में पढाए जाते है।
अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 रानी तिवारी ने भाषा विज्ञान पर चर्चा करते हुए बताया कि भाषा विज्ञान (लिग्विस्टिक्स) भाषा के अध्ययन की वह शाखा है जिसमें भाषा की उत्पत्ति, स्वरूप, विकास आदि का वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। स्वरविज्ञान (फोनेटिक्स) भाषा विज्ञान की एक शाखा है जिसके अन्तर्गत मानव द्वारा बोली जाने वाली ध्वनियों का अध्ययन किया जाता है। छात्र-छात्राओं ने भाषा विज्ञान पर एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय सम्बन्धी रिपोर्ट में जो प्रस्ताव रखें गए, उनके विषय में अपने पत्र प्रस्तुत किए। हिमांशी गर्ग ने अपने पत्र के माध्यम से बताया कि मैकाले ने सर्वप्रथम धर्मनिरपेक्ष अंग्रेजी भाषा के प्रसार पर जोर दिया और वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा महाविद्यालयों को जो अनुदान दिया जा रहा है, वह मैकाले के पत्र मे इंगित हैै। प्रीति गोयल ने बताया कि अंग्रेजी भाषा के स्वर एवं व्यंजनों का वर्गीकरण हमारे स्वरविज्ञान के लक्षणों पर आधारित है। हिन्दी एवं संस्कृत में भी दोनो का वर्गीकरण स्पष्ट दिखाई देता है। संदीप ने विस्तार से बताया कि किस तरह से भाषा बोलने के दौरान हमारे शारीरिक अंगो का प्रयोग होता है। जैसे ओष्ठय शब्द कौन से हैं एवं अनुनासिक शब्द कौन से हैं एवं उनको किस तरह से बोला जाता है। इन सबके बोलने में वायु मूल रूप से काम करती है जिसके लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग फेफडे होते हैं। इसी क्रम में में मोनिका ने भाषा की विशेषता के बारे में बारे में अपना पत्र प्रस्तुत किया और कहा कि भाषा सर्वप्रथम ध्वनि आधारित होती है और ध्वनि के आधार पर बोले गये शब्दों के द्वारा हम अर्थ ग्रहण करते हैं। जेनी ने भाषा वैज्ञानिक ए0एन0 चौक्स्की के रचनांतरण व्याकरण पर, श्वेता ने वुड्स डिस्पैच पर, शिल्पी ने भाषा विज्ञान की मुख्य अवधारणाओं पर अपने पत्र प्रस्तुत किए। नेहा, अमिता एवं विवेक ने भी अपने पत्र प्रस्तुत किये। अन्त में पारूल ने आधुनिक श्रव्य एवं भाषा के उपकरणों के बारे में बताया कि नई तकनीक के माध्यम से भाषा को सरलता से सीखा जा सकता है। इस संगोष्ठी में विभाग की अन्य सभी शिक्षिकाऐं उपस्थित रहीं। कॉलिज के प्राचार्य डॉ0 सतीश कुमार ने इस संगोष्ठी के आयोजन के लिए अंग्रेजी विभाग की सराहना की व विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
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