
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा को लग सकता है झटका
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन माह में कराने का निर्देश दिया है। जनपद हापुड़ में 273 ग्राम पंचायत, 352 गांव, चार विकासखंड (गढ़मुक्तेश्वर, धौलाना, हापुड़ और सिंभावली) जिला पंचायत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आगामी विधानसभा 2027 की कुंडली साबित होगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, बसपा व सपा अपने-अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेगी। हापुड़ जनपद में दलित, मुस्लिम व यादव पूरी तरह से भाजपा विरोधी है और हर हाल में भाजपा को पराजित करने के मूड में दिखाई दे रहा है। उसकी एक खास वजह है कि बसपा के टिकट पर विजयी प्रत्याशी बाद में सत्ता की भलाई चाटने के लिए भाजपाई हो गए और हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा दिया। ऐसे दल बदलुओं से बसपा का कैडर वोट पूरी तरह खफा है।
भाजपा भले ही बूथ लेबिल तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा होने तथा जातीय समीकरण का दावा करती हो। परंतु सब कुछ वास्तविकता से परे है। यदि भाजपा में उसके अनुषांगिक संगठनों पर नजर डालें तो संगठन में ऐसे लोगों का वर्चस्व है जिनका समाज में कोई वजूद नहीं है और लोग पास बैठाना तक पसंद नहीं करते।
ऐसे लोग भाजपा की बैठकों में दिखाई तो देते हैं। परंतु आम नागरिकों से कोसों दूर है। गत निकाय चुनाव हापुड़, बाबूगढ़ व जिला पंचायत में भाजपा से नाराज वाटर अपना रंग दिखा चुका है।
जनपद हापुड़ का दलित वाटर बसपा के झंडे के तले एकजुट नजर आ रहा है। यदि मुस्लिम वोटर भी साथ आ जाए तो भाजपा के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है। यदि इंडिया गठबंधन ने साथ दे दिया तो भाजपा को करारा झटका लग सकता है। जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख चुनाव में एक बार फिर हॉर्स ट्रेडिंग की संभावना अभी से प्रबल होती दिखाई दे रही है।
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