
नकली दवा कारोबारियों पर हो कठोर कार्रवाई, वैध दवा व्यापारियों को न बनाया जाए अपराधी: सुरेश गुप्ता
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़। आयुक्त महोदया खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश के नित नए आदेशों के सम्बन्ध में दिनांक 11 अक्टूबर को हापुड़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक जिलाध्यक्ष दिनेश त्यागी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें आयुक्त महोदय द्वारा फुटकर एवं थोक दवा विक्रेताओं पर किए जा रहे नित नए आदेशों पर चिंता व्यक्त कर विरोध जताया गया।
बैठक में जिलाध्यक्ष दिनेश त्यागी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त महोदया द्वारा जारी किए आदेशों को व्यवहारिक नहीं कहा जा सकता उनके द्वारा किए जा रहे आदेशों से दवा कारोबारियों में डर का माहौल पैदा हो गया है उनकी नियत जरूर अच्छी है परंतु बनाई जा रही नीतियां गलत है उनके द्वारा दिए जा रहे आदेशों से सही दवा का कारोबार करने वाले व्यापारियों में चिंता की लहर साफ देखी जा सकती हैं। जिसको लेकर प्रादेशिक संस्था केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश के महासचिव सुरेश गुप्ता ने आयुक्त महोदया को आदेशों के पुनः अवलोकन करने और वैध दवा कारोबारियों को राहत प्रदान करने के लिए बिन्दुवार पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि नकली दवा मिलने के मामलों में केवल खुदरा विक्रेता तक कार्रवाई सीमित करने के बजाय पूरी सप्लाई चेन की जांच होनी चाहिए। दवा का निर्माण कहां हुआ किस लाइसेंस के तहत हुआ और किस डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से बाजार तक पहुंची इसकी भी जिम्मेदारी तय की जाए। नकली दवा पाएं जाने पर सम्बन्धित निर्माण इकाई का लाइसेंस रद्द होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फर्जी बिल-पैकिंग बंद या निलंबित इकाइयों से दवाओं की आपूर्ति और दूसरे राज्यों के माध्यम से अवैध स्टॉक की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। इसके लिए दवाओं की पूरी सप्लाई चेन की डिजिटल ट्रेसबिलिटी और नकली दवा मामलों में जांच व टेस्टिंग की समयबद्ध व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दवाओं की एक ही साल्ट और मात्रा की अलग-अलग ब्रांड की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए। एमआरपी और मार्केटिंग नीति निर्धारित करने में दवा व्यापारी की भूमिका नहीं होती इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी सरकार उसी स्तर पर तय करें जो एजेंसियां इसकी कीमत निर्धारित करती है। इसमें दवा विक्रेता को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
उन्होंने ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं में अंतर को लेकर भी सवाल उठाए सरकार से दोनों की स्पष्ट नीति बनाने की मांग की ताकि मरीजों को दवा को लेकर भ्रम की स्थिति न बने क्योंकि दवा को बाजार में उतारने की नीति भी सरकार बनाती हैं अनुमति भी सरकार देती हैं ना कि दवा विक्रेता फिर दवा विक्रेता को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
महामंत्री विकास गर्ग ने कहा कि दवा का लाइसेंस डिजिटल लाइसेंसिंग व्यवस्था है जिसमें ऑनलाइन लाइसेंस रिटेंशन /नवीनीकरण को पोर्टल पर स्वत: होने के केंद्रीय कानून के बाद भी ONDLS पोर्टल पर लाइसेंस/रिटेंशन लंबित रहने और विभाग के चक्कर लगाने से अनावश्यक विभागीय आपचारिकताओं के साथ साथ इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिल रहा है जो दवा विक्रेताओं की समस्या का प्रमुख कारण है रिटेंशन/नवीनीकरण के निस्तारण की समय-सीमा निर्धारत और स्पष्ट होनी चाहिए।
विकास गर्ग ने कहा कि फुटकर दवा विक्रेताओं को बेबसाइट बनाकर प्रत्येक सप्ताह सेल (बिक्री) और स्टॉक को अपलोड करना ना तो व्यवहारिक है और ना ही कानून संगत है। साथ ही अस्पताल/हॉस्पिटल में स्थित फार्मेसी/मेडिकल स्टोर पर सभी दवाओं का खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य की सूची चस्पा करना भी कहीं से न्याय पूर्ण नहीं है इससे मरीजों और दवा दुकानदारों में विवाद होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि देश में किसी भी उत्पाद/सामान के क्षेत्र में दुकानदार की खरीद के वास्तविक मूल्य के साथ बिक्री मूल्य प्रदर्शित करने की कोई व्यवस्था लागू नहीं है फिर दवाओं की बिक्री में ऐसा क्यों।
DPCO 1995 जो अब NLEM 2013 है के अनुसार दवाओं पर ज़्यादा मूल्य अंकित की जांच को लेकर सरकार अपने स्तर से जांच एजेंसी के माध्यम से अधिकारी नियुक्त कर समय समय पर दवा की दुकानों अस्पतालों/हॉस्पिटल की फार्मेसियों में दवाओं पर अंकित MRP (मूल्य) की जांच कराती हैं। ज्यादा MRP की दवा मिलने पर सम्बन्धित दवा कंपनी और निर्माण इकाई पर दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए जिससे मरीजों को सस्ती दरों पर दवाइयां मिल सके। इसके लिए दवा विक्रेता पर कार्यवाही होना कही से भी न्याय संगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दवा कारोबार केंद्रीय कानून के अंतर्गत आता है उससे संबंधित आदेश केंद्रीय कानून के अनुरूप होने चाहिए। वैध व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाते हुए विभाग को वास्तविक अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बैठक में संजय कुमार अग्रवाल, दीपक त्यागी, राजीव डंग, गौरव गर्ग, नीरज डाबरा, अजय सोढ़ा, संजीव कुमार, लईक अहमद, अरुण गोयल, प्रवीण त्यागी, अनिल रुहेला, विपिन अग्रवाल, सुशील शर्मा आदि उपस्थित रहें।
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