
हापुड़ में चीनी मिलों का नया पेराई सत्र: 36 गांवों के गन्ने के आवंटन पर सस्पेंस!
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ जिले में आने वाले नए पेराई सत्र को लेकर चीनी मिलों और गन्ना विभाग की हलचल तेज हो गई है। पिछले सत्र के दौरान सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों से हटाए गए 36 गांवों के गन्ने को लेकर अब खींचतान शुरू हो गई है। बुलंदशहर, मेरठ और मोदीनगर की चीनी मिलों ने इन गांवों में गन्ने की खरीद के लिए सर्वे पूरा कर लिया है। अब अगले महीने केन कमिश्नर के साथ होने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया जाएगा कि किस गांव का गन्ना किस मिल को आवंटित होगा।
आपको बता दें कि पिछले पेराई सत्र में गन्ना भुगतान समेत अन्य विवादों के कारण सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों से 36 गांवों के सेंटर हटा दिए गए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों मिलें फरवरी के महीने में ही ‘नो केन’ हो गई थीं। इन 36 गांवों का लगभग 65 लाख क्विंटल गन्ना मेरठ, मोदीनगर और बुलंदशहर की अन्य चीनी मिलों को सप्लाई किया गया था।
हालाँकि गन्ना विभाग ने इस बार 15 अक्टूबर से चीनी मिलें चलाने का निर्देश दिया है, लेकिन जानकारों की मानें तो मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक ही चालू हो पाएंगी। इसके पीछे दो बड़ी चुनौतियाँ हैं— पहली चुनौती है चीनी की रिकवरी। अभी गन्ने में उतनी मिठास नहीं आई है कि मानक के अनुसार चीनी मिल सके, जिसका सर्वे अगले महीने के पहले सप्ताह में कराया जाएगा और दूसरी बड़ी चुनौती है गन्ने का कम रकबा! इस वर्ष जिले में पिछले साल के मुकाबले 2386 हेक्टेयर गन्ने की फसल कम बोई गई है। पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह गिरावट 5 हजार हेक्टेयर से भी अधिक की है, जिसका सीधा असर चीनी मिलों के पेराई सत्र पर पड़ने वाला है।
अब देखना यह होगा कि अगले महीने केन कमिश्नर की बैठक के बाद हापुड़ की चीनी मिलों के हिस्से कितना गन्ना आता है और नया सत्र किसानों के लिए कितना राहत भरा रहता है।
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