
“होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त 3 मार्च की प्रातः 5:29 से 6:19 बजे तक”: ज्योतिष आचार्य यश त्यागी
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है, पर उस समय भद्रा नहीं होनी चाहिए भद्रा के समय होलिका दहन करना निषेध है।इस वर्ष 2 मार्च को 17:55 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही भद्रा लगेगी जो अगले सूर्योदय पूर्व 05:29 तक रहेगी।
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण है निर्णयसिन्धु में कहा है कि पूर्णिमा को ग्रहण हो तो उससे पूर्वरात्रि में जिस समय भद्रा न हो उसमें होली जलाए। अगर दूसरे दिन ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण हो तो पिछले दिन भद्रारहित रात्रि के चौथे प्रहर में सूर्योदय से पहले जलाएं
“तत्र #ग्रहणनिर्णयः।
अत्र चेच्चन्द्रग्रहण तदा ततोर्वानिशि भद्रावर्जं पौर्णमास्यां होलिकादीपनम्।
अथ #परेऽह्निग्रस्तोदयास्तदा पूर्वदिने भद्रावर्णं रात्रौ चतुर्थयामे होलिका कार्या।” – निर्णयसिन्धु
जयसिंह कल्पद्रुम में तो प्राचीन परंपरानुसार भविष्योत्तरपुराण के प्रमाण से ‘भद्रान्ते सूर्योदयात् पूर्वे’ ही सर्वश्रेष्ठ माना है, ‘यदा तु प्रदोषे पूर्वदिने भद्रा भवति परदिने चास्तात्पूर्वमेव पंचदशी समाप्यते तदा सूर्योदयात्पूर्वं भद्रान्तं प्रतीक्ष्य होलिका दीपनीया अतः इस साल 2-3 मार्च की रात्रि में निम्न मुहूर्त में होलिका दहन शास्त्रसम्मत है…
सर्वश्रेष्ठ तो भद्रासमाप्ति पर सूर्योदय से पूर्व – 05:29 – 06:19 ही है और यदि ये शुभ मुहूर्त नहीं प्राप्त होता तभी भद्रापुच्छ – रात्रि में 01:30 – 02:36 के बीच विशेष परिस्थिति में विकल्प होता परन्तु शुद्ध मुहूर्त प्राप्त होने की स्थिति में 2 मार्च को प्रदोष के समय या रात्रि में होलिकादहन इस वर्ष पूर्णतः शास्त्र विरुद्ध है। इसलिए 2 मार्च को प्रदोषकाल या रात्रि में इस साल होलिका दहन नहीं हो सकता है..
तथा चुकी भद्रा में होलिकादहन कथमपि शास्त्रसम्मत नहीं है क्योंकि.”भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।
#श्रावणी नृपति हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी॥
निर्णयसिन्धु अनुसार श्रावणी और होलिकादन भद्रा होने पर न करे भद्रा में श्रावणी से राजहानि तथा होलिकादहन से ग्रामदाह होता है एक और उदाहरण भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभंगं करोति वै। पुराणसमुच्चय
भद्रा में होली दाह से राष्ट्रभंग होता है अतः 3 मार्च को भी प्रदोषकाल में होलिका दहन नहीं हो सकता क्योंकि 3 को प्रदोष में पूर्णिमा ही नहीं है और प्रतिपदा में होलिका दहन निषिद्ध है क्योंकि यहाँ इस शास्त्र वचन से नन्दायां नरकं घोरं भद्रायां देशनाशनम्।
दुर्भिक्षं च चतुर्दश्यां करोत्येव हुताशनः॥ प्रतिपदा में होलिकादाह से नरक, भद्रा में देशनाश, और चतुर्दशी में करने से दुर्भिक्ष होता है।
प्रतिपद्भूतभद्रासु यार्चिता होलिका दिवा।
संवत्सरं तु तद्राष्ट्रं पुरं दहति साद्भुतम्॥
प्रतिपदा, चतुर्दशी, भद्रा और दिन, इनमें होली जलाना सर्वथा त्याज्य है। कुयोगवश यदि जला दी जाए तो वहाँ के राज्य, नगर और मनुष्य अद्भुत उत्पातों से एक ही वर्ष में हीन हो जाते हैं।
निष्कर्ष इस वर्ष 3 मार्च को सूर्योदय पूर्व 5.29 से 6.19 बजे तक (दिल्ली व आस पास) होलिका दहन के लिए भद्रा रहित तथा सूतक रहित पूर्ण शुद्ध लाभकारी श्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है
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