
उपासना से ही परम आनंद की प्राप्ति:आचार्य योगेश भारद्वाज
हापुड़,सीमन (ehapurnews.con):आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में आयोजित ऋषि बोधोत्सव के अंतर्गत शनिवार को आचार्य योगेश भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को राग-द्वेष से ऊपर उठना होगा तथा मोह में आवश्यकता से अधिक नहीं उलझना चाहिए। जब मन विषयों की ओर भागता है, उसे नियंत्रित कर भीतर की ओर मोड़ने का अभ्यास ही प्रत्याहार है। मन को साध लेना ही साधना का मूल है।
उन्होने ने स्पष्ट किया कि उपासना से प्राप्त होने वाला आनंद संसार के समस्त भोगों से कहीं अधिक और स्थायी होता है। उन्होंने कहा कि बाह्य सुख क्षणिक हैं, जबकि उपासना से मिलने वाला सुख असीम और आत्मिक होता है। अपने उद्बोधन के पश्चात उन्होंने एक संक्षिप्त साधना-अभ्यास के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को प्रत्याहार की अनुभूति भी कराई, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूर्ण एकाग्रता और उत्साह के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम का वातावरण गहन शांति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
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