हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हिंदी प्रोत्साहन समिति हापुड़ के तत्वावधान में एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज सेवी राकेश माहेश्वरी ने कहा कि कवि एवम् साहित्यकार समाज की विसंगतियों पर प्रहार कर समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष डा. अनिल बाजपेई ने की तथा संचालन गरिमा आर्य ने किया।
मां शारदे की वंदना के पश्चात डा. मीनू वर्मा ने पढ़ा, ‘स्वतन्त्रता की खुदी नींव में,प्रगति पत्थर तुम्हें रखना है,स्वयं को अबला ना समझो,धात्री हो सम्पूर्ण विश्व की, डा. अनिल बाजपेई ने पढ़ा ‘सदमें में डूबा ये सारा शहर है! और वो आज अभी तलक बेखबर है!! उम्मीद का हमें सूरज दिखा रहे जो! कुछ नहीं यारो सभी कुछ बेअसर है।’
गरिमा आर्य ने पढ़ा मेरा मन मुझसे ये पूछे, मेरे अंदर रहता कौन, प्रेम के मोती आंखों में, फिर प्रेम सरीखा बहता कौन, ‘डा. आराधना बाजपेई ने पढ़ा, हर नारी की अस्मिता,पावन नहीं प्रमोद,शरशैया भीष्म मिली,मिली जटायु गोद।’
डा. मीनू शर्मा ने पढ़ा,शाश्वत है, कलियुग का दर्पण,कहाँ है? निष्ठा और समर्पण,सत्य पक्ष अब नष्ट हो रहा,हर मानव क्यों भृष्ट हो रहा।’ मुक्ता शर्मा ने पढ़ा, ‘अध्ययन मनन की ओर चल, कर्तव्य पथ पर जो मिला वह कर लिया स्वीकार, सब है।’ डा पुष्पा गर्ग ने पढ़ा मंगल कार्यों से भरा ,चैत्र मास का पर्व। नई उम्मीदें,नई किरण मन में हरषे हर्ष।। कवि सम्मेलन के अंत में समिति की संयोजक गरिमा आर्य ने सभी का आभार व्यक्त किया।























