
हापुड़, सीमन/ संजय कश्यप, अमित कुमार (ehapurnews.com): उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात हेड कांस्टेबल की एक घिनौनी हरकत सामने आई है। हेड कांस्टेबल सचिन पुत्र प्रमोद फिलहाल बिजनौर में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है जोकि दो किशोरों को पकड़कर होशियारपुर गढ़ी स्थिरल अपने घर लाया और बंधुआ मजदूरी करवाने लगा। एक 14 और एक 12 साल के किशोर से देर रात 12:00 तक बंधुआ मजदूरी कराई जाती जिसके बदले कोई रुपया भी नहीं मिलता। इतना ही नहीं बच्चों को भूखा रखा जाता और उन्हें कमरे में बंद कर बाहर कुत्ते बांध दिए जाते जिससे दोनों ही बालक भागने की कोशिश ना कर सकें। कुछ लोगों को जब इस दर्दनाक दास्ताँ की भनक लगी तो उन्होंने उच्च अधिकारियों का मामले से अवगत कराया। इसके बाद लखनऊ हेडक्वार्टर से मिले आदेश के क्रम में कार्रवाई करते हुए अधिकारियों की टीम ने छापा मार कर दोनों बच्चों का सकुशल रेस्क्यू किया। बच्चों के पूरे शरीर पर इंफेक्शन फैला हुआ है जिनसे जहरीले कीटनाशक दवाइयां का खेतों में छिड़काव भी कराया जाता था। बच्चों का उपचार कराया गया और उनके परिजनों से संपर्क साधा गया। बताया जा रहा है कि करीब 15 महीनों से बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। मामले में हेड कांस्टेबल के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है।
हेड क्वार्टर से मिली सूचना:
शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत लखनऊ हेड क्वार्टर में की। इसके पश्चात जिला प्रोबशन अधिकारी स्मिता सिंह, न्याय पीठ बाल कल्याण समिति हापुड़ के अध्यक्ष अभिषेक त्यागी, सदस्य बाबूराम गिरी ने शुक्रवार को टीम का गठन किया। थाना AHTU, चाइल्ड हेल्पलाइन हापुड़, बाल कल्याण समिति, थाना बाबूगढ़ की संयुक्त टीम ने बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव होशियारपुर गढ़ी में छापा मार कार्रवाई की और दो नाबालिकों को बंधुआ मजदूरी करते देखा। इसके बाद टीम ने दोनों बच्चों का रेस्क्यू किया।
दोनों को हेड कांस्टेबल लाया था:
बच्चों ने बताया कि वह सीतापुर जनपद के रहने वाले हैं जिन्हें प्रमोद पुत्र रामचरण के परिवार में बंधुआ मजदूरी करने के लिए प्रमोद का बेटा सचिन उन्हें सीतापुर से लाया था। सचिन उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर बिजनौर में तैनात है।
बच्चों को रखते भूखा प्यासा:
बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें यहां भूखा रखा जाता था। पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे। 15 महीने से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। बंधुआ मजदूरी के बदले उन्हें पैसे भी नहीं मिलते थे। ना ही उनके माता-पिता से बात कराई जाती। बच्चों से रात 12:00 बजे तक काम लिया जाता था। 12:00 बजे के बाद दोनों बच्चों के साथ मारपीट करके उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाता और बाहर कुत्ते बांध दिए जाते जिससे कि वह बाहर ना निकल सके। सुबह 5:00 से रात 12:00 तक बच्चों से प्रतिदिन 15 से 20 गाय व भैंसों का कार्य कराया जाता और खेतों में जहरीली कीटनाशक दवाइयां का छिड़काव भी कराया जाता जिससे दोनों बच्चों के पूरे शरीर पर इंफेक्शन भी फैला हुआ है। दोनों बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाने के लिए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति हापुड़ द्वारा कार्रवाई की जा रही है। बच्चे बाल कल्याण समिति हापुड़ के संरक्षण में है। बताया जा रहा है कि हेड कांस्टेबल के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त टीम में विधि सह परिवीक्षा अधिकारी रविंदर कुमार, बाल कल्याण समिति से सह आंकड़ा विश्लेशक मुकेश कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन से सुपरवाइजर जीतू गंगवार, थाना AHTU से उप निरक्षक लीलाराम मीणा, महिला आरक्षी निकिता तोमर आदि उपस्थित रहे।
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