हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य को बढ़ाने वाली पति के उन्नति व सफलता के लिए किया जाने वाला हरितालिका व्रत 6 सितंबर शुक्रवार को रखा जाएगा। बिना अन्न -जल ग्रहण किए हुए व्रत में महिलाएं सायंकाल शुभ बेला में भगवान शिव-पार्वती जी की पूजा कर सौभाग्यवती होने की प्रार्थना करें। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि इस बाऱ तृतीया व चतुर्थी तिथि का संयुक्त योग होने से कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होगा। परन्तु इसी दिन शाम में चतुर्थी तिथि प्राप्त होने से चन्द्र दर्शन निषेध है।
चन्द्रमा को मिला था शाप:
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। अतः यदि किसी ने चन्द्रमा को देख लिया तो उसके ऊपर मिथ्या (झूठा) आरोप निश्चित लगता है। अपयश मिलता है। यदि गलती से देख ले तो ‘सिंहः प्रसेनमव.’ इस मंत्र का जप करें तथा विष्णु पुराण में वर्णित कथा स्यामंतक मणि की कहानी भी श्रद्धा से पढ़े या सुने तथा विघ्नहर्ता मंगलदायक भगवान गणेश जी के 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का आरम्भ 7 सितंबर 2024 दिन शनिवार गणपति स्थापना के साथ होगा।
ऐसे करें पूजा:
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणपति को विद्या, बुद्धि , विघ्न हर्ता, मंगलकारी, रक्षा कारक, सिद्धि , समृद्धि, शक्ति और सम्मान देने वाले भगवान के रूप में पूजा जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर को दोपहर बाद 3 बजकर 01 मिनट से आरम्भ होकर 7 सितंबर को सायं 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार भगवान गणपति का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के मध्यान्ह काल में अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। 7 सितंबर को दोपहर में 11.50 से 1.40 के बीच स्थिर लग्न, शुभ होरा, ब्रह्म योग तथा सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अभिजीत मुहूर्त के विशेष योग मुहूर्त में गणपति स्थापना करना अत्यंत शुभकारी होगा। लगातार 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव में गणपति बप्पा अनेक पूजा पंडाल व घरों में विराजेंगे तथा समापन गणपति जी की विदाई 17 सितंबर मंगलवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। अतः अशुभ फल से बचने व शुभ फल प्राप्ति के लिए सुबह 9.10 से 10.43 राहुकाल एवं दोपहर 1.49 से 3.23 तक यमगण्ड काल में गणपति स्थापना बिल्कुल ना करें अन्य समय में शुभ मुहूर्त देखकर कर सकते है गणेश जी को पूजन में हल्दी की माला, दूर्वा, रोली, कलावा, जनेऊ, मोदक, पान, सुपारी, केला, लौंग, इलायची अवश्य अर्पित करें, ध्यान रहे तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए मिट्टी से बने हुए भगवान श्री गणेशजी जिनकी सूढ़ दाहिनी ओर घूमी हुई हो को स्थापित करें स्थापना के समय ॐ गं गणपतये नमः का जप भी करते रहे तथा आरम्भ में इस मंत्र का जप करें –
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
लक्ष्मी शॉपिंग मार्ट से खरीदें आइटम ज़रा हटके: 9837477500



























