जनपद में मनाया गया एकीकृत निक्षय दिवस
टीबी उन्मूलन का मूल मंत्र है जागरूकता : सीएमओ
सभी सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर टीबी के बारे में दी गई जानकारी
लक्षणयुक्त रोगियों के स्पुटम जांच के लिए भेजे गए
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़, 15 मई, 2024। जनपद में बुधवार को एकीकृत निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी के कुशल निर्देशन में सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वासथ्य केंद्रों (पीएचसी) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ओपीडी में टीबी के बारे में जानकारी दी गई और लक्षण युक्त रोगियों की टीबी जांच के लिए स्पुटम (बलगम का नमूना) लिए गए। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) स्टाफ ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ओपीडी रजिस्टर का अवलोकन करने के साथ ही ओपीडी में उपलब्ध रोगियों को टीबी के बारे में जानकारी देने में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का सहयोग किया। मई माह के पहले पखवाड़े में हुए सीएचओ प्रशिक्षण का असर भी एकीकृत निक्षय दिवस पर देखने को मिला।
इस मौके पर सीएमओ डा. सुनील कुमार त्यागी ने कहा- टीबी उन्मूलन का मूल मंत्र जागरूकता है, केवल जागरूकता से ही टीबी उन्मूलन संभव है। दूर-दराज के क्षेत्रों में आज भी ऐसे लोग हैं जो टीबी को एक कलंक की तरह मानकर छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसा करना अपनों को खतरे में डालना है। दरअसल टीबी के 80 प्रतिशत से अधिक मामले फेफड़ों की टीबी से संबंधित होते हैं और फेफड़ों की टीबी सांस के जरिए फैलती है। कोई भी रोगी यदि टीबी का उपचार लेने में देरी करता है तो इस बीच उसके परिजन भी संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए टीबी को छिपाएं नहीं, बल्कि जांच कर उपचार कराएं। उन्होंने कहा हर माह की 15 तारीख को एकीकृत निक्षय दिवस के आयोजन का उद्देश्य आउटरीच एरिया में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने कहा – टीबी का अच्छा उपचार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है। दो माह के नियमित उपचार के बाद रोगी के संपर्क में रहने वालों को संक्रमण लगने का खतरा नहीं रहता। अधिकतर मामलों में छह माह के नियमित उपचार के बाद टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। लेकिन चिकित्सक की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करनी। दवा बीच में छोड़ने पर टीबी बिगड़ जाती है और उस स्थिति में टीबी का उपचार और लंबा व मुश्किल हो जाता है।
जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया – उपचार के दौरान बेहतर पोषण के लिए रोगी को हर माह पांच सौ रुपए की पोषण राशि सरकार की ओर से दी जाती है। उन्होंने बताया टीबी के उपचार के लिए नियमित दवाओं के साथ पोषण भी जरूरी होता है। पोषण के अभाव में टीबी की दवाएं खाने से परेशानी हो सकती है।
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