विश्व क्षय रोग दिवस 24 मार्च को, टीबी के बारे में जानें और इससे बचाव करें : डीटीओ
– लक्षण नजर आने पर जांच और पुष्टि होने पर टीबी का उपचार कराएं
– विश्व क्षय रोग दिवस की थीम “हां, हम टीबी खत्म कर सकते हैं”
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़, 23 मार्च, 2024। हर वर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक टीबी के बारे में जानकारी पहुंचाना है। टीबी से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। जन समुदाय को यह भी जानना जरूरी है कि टीबी एक खतरनाक रोग है, लापरवाही करने पर यह जानलेवा हो सकता है, यह रोग असाध्य नहीं है। यानि समय से जांच कराकर उपचार कराया जाए तो टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। टीबी किसी तरह का कलंक भी नहीं है, इसलिए इसे छिपाने की भी जरूरत नहीं है। यह बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी ने कहीं। उन्होंने बताया – इस बार विश्व क्षय रोग दिवस की थीम, “हां, हम टीबी खत्म कर सकते हैं” रखी गई है।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया – टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से होने वाला रोग है। यूं तो टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, लेकिन टीबी सर्वाधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है। फेफड़ों की टीबी को पल्मोनरी और अन्य अंगों की टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। पल्मोनरी टीबी फेफड़ों को प्रभावित करती है इसलिए यह सांस के जरिए फैलती है। केवल पल्मोनरी टीबी ही संक्रामक होती है, पल्मोनरी टीबी के मामले अधिक होने का कारण भी यही है। पल्मोनरी टीबी का एक रोगी उपचार शुरू न होने की स्थिति में 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर देता है। समय से जांच और उपचार शुरू करने के साथ थोड़ा एहतियात बरत कर संक्रमण को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
डीटीओ डा. राजेश सिंह ने कहा – क्षय रोगी यदि नियमित रूप से दवा खाता है तो उपचार शुरू करने के दो माह बाद उसके सांस के जरिए संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंचने की आशंका नहीं रहती। सामान्यतः छह माह तक नियमित उपचार के बाद टीबी रोगी पूरी तरह ठीक हो जाता है, लेकिन बीच में दवा छोड़ने पर बिगड़ी टीबी (मल्टी ड्रग रेसिस्ट टीबी-एमडीआर) बन जाती है। ऐसे रोगी पर सामान्य दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। उसके उपचार में बदलाव करना पड़ता है और उपचार की अवधि भी बढ़ जाती है, इसलिए दवा बीच में छोड़ने की गलती क्षय रोगी को भारी पड़ जाती है। दूसरी ओर समय से उपचार शुरू करने और मास्क का प्रयोग करने से रोगी खुद भी ठीक हो जाता है और उसके परिजनों को भी संक्रमण खतरा नहीं रहता।
जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया – टीबी के बारे में सही जानकारी, अच्छा पोषण और समय पर उपचार से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। क्षय रोगियों को सलाह दी जाती है कि वह खुले में न थूंकें। हवादार कमरे में रहें। बंद स्थान पर किसी के संपर्क में न रहें। खांसते समय अपने मुंह को ढकना न भूलें। हाथों को साबुन-पानी से धोते रहें। उच्च प्रोटीन युक्त भोजन करें। उपचार शुरू होने के दो माह तक स्कूल या कार्यालय जाने से बचें।
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