हापुड,सीमन(ehapurnews.com): श्रद्धा पूर्वक सेवा करना श्राद्ध कहलाता है और अपने पितरों की आवश्यकताओं को पूर्ण कर तृप्त करना ही तर्पण कहलाता है। यह विचार वैदिक विद्वान आचार्य धर्मेंद्र शास्त्री ने आज आर्य समाज हापुड़ द्वारा अंतर्जालीय सत्संग में कहे। उन्होंने कहा कि श्राद्ध और तर्पण जीवित माता -पिता व परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्यों की प्रतिदिन श्रद्धा से सभी प्रकार से देखभाल कर सेवा करनी चाहिए। हमें कुछ समय उनके पास बैठकर, हालचाल मालूम करके उनकी आवश्यकताओं की प्रसन्न मन से पूर्ति कर तृप्त रखना चाहिये।
सत्य सनातन वैदिक धर्म में पांच महायज्ञ होते हैं जो नित्य करने होते हैं उनमें एक पितृ यज्ञ भी है। प्रत्येक गृहस्थ को प्रतिदिन पितृ यज्ञ अर्थात अपने माता, पिता व परिवार के सभी वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान, सेवा, सुषरसा करते रहना चाहिए।
महिला प्रधान शशि सिंघल व पूर्व प्रधान माया आर्य ने भजनों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया। मंत्री अनुपम आर्य ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये सभी से निवेदन किया कि हंमे अपने जीवन में श्राद्ध व तर्पण वैदिक स्वरूप के अनुसार मनाने चाहिये। संयोजक आनंद प्रकाश आर्य ने सभी वक्ताओं व श्रोताओं को धन्यवाद दिया।


























