हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ की इन्द्रलोक कालोनी में चल रही संगीतमय श्री शिव महापुराण के छटे दिन ब्यास पंडित मोहित भारद्वाज जी ने भगवान गणेश और भगवान भोले की लीलाओं का वर्णन बड़े ही मनमोहक तरह से भक्तों को स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि भगवान शब्द पांच तत्वों से मिलकर बना है भ से भगवान, ग से गगन, व से वायु,अ से अग्नि, न से नीर, इन पांच तत्वों से भगवान का निर्माण होता है। हमारे सनातन धर्म में परमात्मा का उच्चारण किया जाता है। जीवन मे सत्यता और विश्वाश होना जरूरी है। हमारे सबसे बड़े भगवान हमारे पूर्वज होते है। कर्मों का फल भोगना पडता है, एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल है। आगे उन्होंने बताया कि मरने के बाद मखाने इसलिए फेंके जाते है ताकि परिवार फला फूला रहे, सिक्के इसलिए फेंके जाते है कि जिसके लिए तू पूरी जिंदगी परेशान रहता है उठा सके तो उठा ले, सब भाग्य साथ लाते है और कर्म साथ लेकर जाते हैं। केबल सत्कर्म साथ जायगा, उन्होंने बताया कि भाई-भाई में सम्पत्ति का बटवारा नहीं करना चाहिए, दुख सुख का बटवारा करना चाहिए, जब तक हृदय में सत्य नहीं आएगा तब तक परमात्मा का निवास नहीं होगा, शंकर को प्राप्त करने के लिए जीवन में सत्यता का होना जरूरी है। आगे उन्होंने बताया की गुरू का अर्थ क्या है, जो हमारे जीवन में अंधकार को मिटाकर प्रकाश भर दे वही गुरु है। गुरु का दिया हुआ मंत्र ही भव से पार लगाता है। गुरु और शिष्या का सम्बन्ध बाप बेटी की तरह होता है। इस दौरान कथा वाचक पंडित मोहित भारद्वाज जी को सुनने के लिए अखिल सिंघल पंडित यश कुमार ,विनोद, भूपेश, कपिल अग्रवाल, चंचल, सोनिया, पिंकी, पारुल, सिन्धु, मंजू, प्रीति, अभिषेक, गप्पू, सुनीता, प्राची, प्रशांत, मोनिका, शीतल ,शरद गर्ग, तरुण कंसल, प्रमोद कुमार, आदि उपस्थित रहे।






















