हापुड़, सीमन(ehapurnews.com ):भारत विकास परिषद हापुड़ के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह के अवसर पर एक आन लाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
अध्यक्षता देवेन्द्र देव ने की तथा संचालन गरिमा आर्य ने किया।
मुख्य अतिथि इंदु वार्ष्णेय ने पढ़ा
‘ह हिंदी ने ह से हमको,
एक सूत्र में हिंदी सिखलाई,करना है गुणगान हमें ,एक यही बात सिखलाई।’
डा अनिल बाजपेई ने पढ़ा,
‘पूरे विश्व में देखिए, हुआ शंख का नाद!
भाषाओं के मध्य में,हिंदी पूनम चांद! ‘
अध्यक्षता करते हुए देवेन्द्र देव ने पढ़ा — ‘सब जलाओ दिए कोटि उनके लिए
हो गए जो हवन निज वतन के लिए’
संचालन करते गरिमा आर्य ने पढ़ा, ‘मानव परस्परावलंब बनो
तुम देश के दृढ़ स्तंभ बनो
ना घात करो ना चाल चलो
तुम देश समाज संभाल चलो
हर जन तुम्हारा बंधु है
इस बात को आत्मसात करो ‘
डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा,
‘ दिल खो गए हैं अब तो केवल दुकान हैं,इंसानियत को भूलते कैसे इंसान हैं,खो गए मीरा शबरी के प्रेम किस्से,घर ढूंढ़ती हूं मिलते केवल मकान हैं ‘
इंदु शर्मा ने पढ़ा – ‘आस माता की होने न पाए दफ़न।
लाश़ अब न किसी की जले बे-कफ़न।
आपसी बैर की लम्बी तकरार में,
टूट जाएँ न उन लाड़लों के सपन ‘ डा सौरभ कांत शर्मा ने पढ़ा – ‘पुण्यग्रन्थों का कोई जो सम्वाद हो ।
मन तरंगों का, मेरी अनुनाद हो।
सुनके पावन हुईं स्वांस सब देह की,
एक श्लोक का जैसे अनुवाद हो ‘
रुचि उनियाल ने पढ़ा ‘लिखनी तो चाही थी हमने भी गज़ल
किंतु केवल दर्द परिभाषित हुए!’
अजय तोमर ने पढ़ा, ‘बन कर जुबान देख किसी बेजुबान की।
करते नही है बात हम साहेब गुमान की।।
बेशक लहूलुहान जिस्म हो गया तो क्या।
ख्वाईस नहीं गई है अभी तक उड़ान की ‘
डा पुष्पा गर्ग ने पढ़ा ‘सागर की गहराई सा,
लहरों की ऊंचाई सा।
कुछ खारा कुछ मीठा सा ,
प्यार पिता का होता है।।’
कविता कुसुमाकर ने पढ़ा ‘दीप उल्फत के जलाएं आंधी और तूफान में,
प्यार की खुशबू लुटाए सारे हिन्दुस्तान में।
नफरतों से जिंदगानी कट नहीं सकती कभी,
आओ चाहत को जगाए आज के इन्सान में।।’
हरित तोमर ने पढ़ा –
‘अपने वीर शहीदों का सम्मान नहीं खोने देंगे
वीरों की कुर्बानी पर समझौता नहीं होने देंगे’।
डा प्रेमलता तिवारी ने हिंदी को सबसे समृद्ध भाषा बताया।
कपिल मल्होत्रा,पूजा गुप्ता,बबीता अग्रवाल का योगदान रहा। देवेन्द्र देव ने सभी कवियों का आभार प्रकट किया।

























